मैं अपनी वफ़ा का इंसाफ किस से मांगता ? दोस्त और दोस्ती शायरी 💬 Share on WhatsApp ✈️ Share on Telegram मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी,वो अपनाने और ठुकरने की अदा भी तेरी थी,मैं अपनी वफ़ा का इंसाफ किस से मांगता ?वो शहर भी तेरा था और वो अदालत भी तेरी थी |
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