दोस्ती कि शायरी - जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ

दोस्ती कि शायरी -

थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ।
ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ।
कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें,
जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ...

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