दोस्ती कि शायरी - जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ शायरी 💬 Share on WhatsApp ✈️ Share on Telegram दोस्ती कि शायरी - थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ। ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ। कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें, जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ...
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