जखमी दिल की शायरी - रखकर दिल पर पत्थर चाँदनी बर्दाश्त करते

जखमी दिल की शायरी -

न जाने रोज कितनी बेबसी बर्दाश्त करते है....
अगर सच पूछिये जिंदगी बर्दाश्त करते है....
किसी को क्या खबर हमपे जो गुजरी है मुहब्बत में
लहू के घूँट पीकर आशिकी बर्दाश्त करते है....
गमो के मौसमो में चाँद भी कितना अखरता है....
की रखकर दिल पर पत्थर चाँदनी बर्दाश्त करते है....


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