तक़दीर है मगर किस्मत नहीं खुलती... ऑरकुट-फेसबुक शायरी 💬 Share on WhatsApp ✈️ Share on Telegram शादी के पहले तक़दीर है मगर किस्मत नहीं खुलती, ताजमहल बनाना चाहता हूँ लेकिन मुमताज़ नहीं मिलती, शादी के बाद (मुमताज़ मिलने के बाद ) तक़दीर है मगर किस्मत नहीं खुलती, ताजमहल बनाना चाहता हूँ लेकिन मुमताज़ नहीं मरती ...!!!
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